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डे बुक (जर्नल): आसान शब्दों में डेबिट और क्रेडिट
डे बुक हर एंट्री तारीख के क्रम में दिखाती है और हर एक के लिए बताती है कि कौन से खाते छूते हैं: किसे डेबिट और किसे क्रेडिट। अकाउंटेंट बिजनेस को ऐसे ही देखता है। इसे हाथ से लिखने की ज़रूरत नहीं; यह आपके पहले से लिखे बिलों और पेमेंट से बनती है।
डेबिट और क्रेडिट, आसान भाषा में
हर एंट्री कम से कम दो खातों को छूती है, और कुल डेबिट हमेशा कुल क्रेडिट के बराबर होता है। दुकान के ज़्यादातर काम तीन आसान नियमों में आ जाते हैं:
- कैश और बैंक: पैसा आए तो डेबिट, जाए तो क्रेडिट।
- कोई व्यक्ति (ग्राहक या सप्लायर): वह आपका ज़्यादा देनदार हो तो डेबिट, आप उसके ज़्यादा देनदार हों या वह पैसा दे तो क्रेडिट।
- बिक्री और कमाई क्रेडिट होती है; खरीद और खर्चे डेबिट।
रोज़ की एंट्री
| क्या हुआ | डेबिट | क्रेडिट |
|---|---|---|
| ₹1,180 की कैश बिक्री (₹1,000 + 18% GST) | कैश 1,180 | बिक्री 1,000; आउटपुट CGST 90; आउटपुट SGST 90 |
| गिल ट्रेडर्स को उतनी ही उधार बिक्री | गिल ट्रेडर्स 1,180 | बिक्री 1,000; आउटपुट CGST 90; आउटपुट SGST 90 |
| गिल ट्रेडर्स ने UPI से ₹1,180 दिए | बैंक 1,180 | गिल ट्रेडर्स 1,180 |
| गुप्ता स्टील से उधार माल, ₹5,000 + 18% IGST | खरीद 5,000; इनपुट IGST 900 | गुप्ता स्टील 5,900 |
| किराया ₹18,000 बैंक ट्रांसफर से | किराया (खर्चा) 18,000 | बैंक 18,000 |
| ₹20,000 कैश बैंक में जमा | बैंक 20,000 | कैश 20,000 |
डे बुक में हर एंट्री में पहले डेबिट लाइनें और उसके बाद क्रेडिट लाइनें "To …" लिखकर आती हैं। डे बुक के नीचे के टोटल हमेशा बराबर होते हैं; न हों तो कुछ गलत है।
यह क्यों काम की है
- CSV फाइल से आपका अकाउंटेंट साल की एंट्री जल्दी जांच सकता है, या अपने सॉफ्टवेयर में डाल सकता है।
- वसूला GST (आउटपुट) और मिलने लायक GST (इनपुट) अपने अलग खातों में रहते हैं, इसलिए GST के आंकड़े इन्हीं एंट्री से आते हैं।
- पार्टी बैलेंस, कैश बुक, बैंक बुक और मुनाफा सब इन्हीं लाइनों से बनते हैं, इसलिए आपस में हमेशा मिलते हैं।
यहां कैसे पढ़ें
कैश और बैंक बुक › डे बुक खोलें और तारीखें चुनें। हर एंट्री में तारीख, क्या था, और डेबिट-क्रेडिट रकम के साथ खाते दिखते हैं। अकाउंटेंट के लिए CSV डाउनलोड (Excel) या कागज़ी कॉपी के लिए प्रिंट इस्तेमाल करें।